Ashtavakra Gita in Hindi pdf Download | अष्टावक्र गीता

Ashtavakra Gita in Hindi pdf – अष्टावक्र गीता

Ashtavakra Gita in Hindi pdf- दोस्तों आज के आर्टिकल में हम आपको बताएंगे Ashtavakra Gita in Hindi pdf और पूरा डिटेल्स में हम आपको बताएंगे। दोस्तों अष्टावक्र गीता अद्वैत वेदान्त का ग्रन्थ है जो ऋषि अष्टावक्र और राजा जनक के संवाद के रूप में है। अष्टावक्र गीता हिन्दू धर्म में श्रीमद भगवत गीता को सबसे पवित्र ग्रन्थ माना जाता है।

Ashtavakra Gita in Hindi pdf

 

भगवद्गीता, उपनिषद और ब्रह्मसूत्र के सामान अष्टावक्र गीता अमूल्य ग्रन्थ है। इस ग्रन्थ में ज्ञान, वैराग्य, मुक्ति और समाधिस्थ योगी की दशा का सविस्तार वर्णन है।
दोस्तों अष्टावक्र गीता में 20 अध्याय है अष्टावक्र गीता ज्ञान योग की सबसे महत्वपूर्ण पुस्तकों में से एक है। इस पुस्तक के बारे में किंवदंती है कि रामकृष्ण परमहंस ने भी यही पुस्तक नरेंद्र को पढ़ने को कहा था। जिसके पश्चात वे उनके शिष्य बने और कालांतर में स्वामी विवेकानंद के नाम से प्रसिद्ध हुए।

Ashtavakra Gita – कुछ अंश

दोस्तों अब हम आपको बताएंगे ashtavakra gita के कुछ अंश। अष्टावक्र आठ अंगों से टेढ़े-मेढ़े पैदा होने वाले ऋषि थे। उनके पिता कहोड़ ऋषि थे जो कि उछालक के शिष्य थे और उनके दामाद भी थे। दोस्तों कहोड़ अपनी पत्नी सुजाता के साथ उछालक के साथ रहती थी उन के आश्रम में। ऋषि कहोड़ वेदपाठी पंडित थे। वे हमेशा रात भर बैठ कर वेद पाठ किया करते थे।

उनको वेद पाठ करना बहुत पसंद था। उनकी पत्नी सुजाता गर्भवती हो गयी थी। गर्भ में बालक जब कुछ बड़ा हुआ तो एक रात को गर्भ के भीतर से ही बोला, “हे पिता ! आप रात भर वेद पढ़ते हैं लेकिन आपका उच्चारण कभी शुद्ध नहीं होता।

ऐसा क्यों। मैंने गर्भ में ही आपके प्रसाद से वेदों के सभी अंगों का ज्ञान प्राप्त कर लिया है।” गर्भस्थ बालक ने यह भी कहा कि रोज-रोज के पाठ मात्र से क्या लाभ। वे तो शब्द मात्र हैं। शब्दों में ज्ञान कहाँ? ज्ञान स्वयं में है। शब्दों में सत्य कहाँ? सत्य स्वयं में है।

Ashtavakra Gita Hindi – अष्टावक्र गीता

अष्टावक्र गीता अध्यात्म विज्ञान का बेजोड़ ग्रंथ है। और अष्टावक्र गीता में ये सब बताया गया है। ज्ञान कैसे प्राप्त होता है ? मुक्ति कैसे होगी ? और वैराग्य कैसे प्राप्त होगा ? ये तीन शाश्वत प्रश्न हैं जो हर काल में आत्मानुसंधानियों द्वारा पूछे जाते रहे हैं। और राजा जनक ने भी ऋषि अष्टावक्र से ये ही प्रश्न किये थे। ऋषि अष्टावक्र ने इन्हीं तीन प्रश्नों का संधान राजा जनक के साथ संवाद के रूप में किया है जो अष्टावक्र गीता के रूप में प्रचलित है।

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ये सूत्र आत्मज्ञान के सबसे सीधे और सरल वक्तव्य हैं। इनमें एक ही पथ प्रदर्शित किया गया है जो है ज्ञान का मार्ग। ये सूत्र ज्ञानोपलब्धि के, ज्ञानी के अनुभव के सूत्र हैं। स्वयं को केवल जानना है—ज्ञानदर्शी होना, बस। कोई आडम्बर नहीं, आयोजन नहीं, यातना नहीं, यत्न नहीं, बस हो जाना वही जो हो।

इसलिए इन सूत्रों की केवल एक ही व्याख्या हो सकती है, मत मतान्तर का कोई झमेला नहीं है; पाण्डित्य और पोंगापंथी की कोई गुंजाइश नहीं है। प्रस्तुत पुस्तक में इतनी सीधी-सादी और सरल व्याख्या की गई है जो सर्वसाधारण को बोधगम्य हो।

Ashtavakra Gita Chapter 20

दोस्तों अभी ऊपर हमने अष्टावक्र गीता के बारे में डिटेल्स में पढ़ा और अष्टावक्र गीता में २० चैप्टर हैं। हमने निचे २० चैप्टर बताये हैं और इस आर्टिकल में हम आप सभी लोगो को अष्टावक्र गीता की सारे डिटेल्स फ्री में पीडीऍफ़ डाउनलोड के लिए भी देंगे।

अष्टावक्र गीता में २० अध्याय हैं-

  1. साक्षी
  2. आश्चर्यम्
  3. आत्माद्वैत
  4. सर्वमात्म
  5. लय
  6. प्रकृतेः परः
  7. शान्त
  8. मोक्ष
  9. निर्वाण
  10. वैराग्य
  11. चिद्रूप
  12. स्वभाव
  13. यथासुखम्
  14. ईश्वर
  15. तत्त्वम्
  16. स्वास्थ्य
  17. कैवल्य
  18. जीवन्मुक्ति
  19. स्वमहिमा
  20. अकिंचनभाव

Ashtavakra Gita pdf Free Download in Hindi – अष्टावक्र गीता

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Ashtavakra Gita in Hindi pdf Download

निष्कर्ष –  दोस्तों हमने आपको इस आर्टिकल में आपको Ashtavakra Gita के बारे में पूरा डिटेल्स में समझाया है और Ashtavakra Gita in Hindi pdf भी डाउनलोड करने के लिए भी दिया है आशा करता हु की आपको हमरी पोस्ट पसंद आयी होगी। अगर आपको हमारा आर्टिकल पसंद आया होगा तो आप अपने दोस्तों के साथ whatsapp पर शेयर कर सकते हैं। थैंक यू।

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