Akbar Birbal Story in Hindi PDF | Free Download

Akbar Birbal Story in Hindi PDF | Free Download

नमस्कार दोस्तो, आज के आर्टिकल में हम आपको Akbar Birbal Story in Hindi PDF एंड Akbar Birbal की प्रसिद्व Story भी बताएंगे। अगर आप Akbar Birbal की Story ढूंढ रहे हैं तो आपको इस आर्टिकल में अकबर बीरबल (Akbar Birbal) की कहानियां पढ़ने को मिल जाएगी। और दोस्तों आर्टिकल को जरूर पूरा पढिये।

Akbar Birbal Story in Hindi PDF

दोस्तो, वैसे देखा जाये तो अकबर बीरबल की बहुत सारी कहानियाँ हैं लेकिन इस आर्टिकल में हम आपको कुछ Best Akbar Birbal की कहानियाँ बताएंगे।

दोस्तों मुग़ल शासक जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर और उनके मुख्य सलाहकार बीरबल (महेश दास) को कौन नहीं जानता होगा? मोहम्मद अकबर हिंदुस्तान के शहंशाह थे, जो सन १५४२ से १६०६ तक हिंदुस्तान के तख़्त पर विराजमान रहे थे. और बीरबल भी उनके नवरत्नों में से एक थे. वे बादशाह अकबर के मुख्य सलाहकार होने के साथ ही उनके परम मित्र और अच्छे मित्र भी थे.

दोस्तो, जब भी बुद्धिमत्ता, चतुराई और हाजिर-जवाबी की बात होती है, तो सबसे पहला नाम बीरबल का आता है। अकबर-बीरबल की जुगलबंदी किसी से छुपी नहीं है। ऐसा कहा भी जाता है कि बीरबल को बादशाह अकबर के नवरत्नों में से एक अनमोल रत्न माना जाता था

अकबर-बीरबल से जुड़ी ऐसी कई कहानियां हैं, जो हर किसी को गुदगुदाती हैं। साथ ही एक खास सीख भी दे जाती हैं। अकबर-बीरबल की कहानियां हमेशा से सभी के लिए प्रेरणादायक रही हैं। तो अब हम कुछ बेस्ट अकबर-बीरबल की कहानियां आपको बताने जा रहे हैं।

Akbar Birbal Story in Hindi PDF

Akbar Birbal Story in Hindi – बीरबल की खिचड़ी कहानी

दोस्तों एक दिन बादशाह अकबर ने घोषणा की, कि जो आदमी सर्दी के इस मौसम में नदी के ठण्डे-ठण्डे पानी में रात-भर खड़ा रहेगा, उसे शाही खजाने से पुरस्कृत किया जायेगा। तो अकबर की यह बात सभी ने सुन ली लेकिन किसी ने भी यस नहीं बोला। फर एक गरीब धोबी ने लास्ट म बोलै अकबर साब में ऐसे कर सकता हु।

और बादशाह अकबर की इस घोषणा को सुनकर एक गरीब धोबी ने सारी रात नदी में खड़े-खड़े बिता दी और अगले दिन बादशाह के दरबार में आकर इनाम मांगने लगा। बोलै बादशाह अकबर साब में सारी रात नदी में खड़े-खड़े बिता दी मुझे मेरा इनाम दिया जाये।

बादशाह ने उस धोबी से सवाल किया, क्या तुम बता सकते हो किस शक्ति के सहारे तुम रात नदी में खड़े रहे ? धोबी ने अपने शक्ति के साथ जवाब दिया, कि
अकबर साब आलमपनाह, मैं कल सारी रात महल की छत पर एक चिराग जलते हुए को देखते रहा। और में उसी की शक्ति से मैं सारी रात नदी में खड़ा रह सका।

बादशाह ने उसका जवाब सुनकर कहा, इसका मतलब तो यह हुआ की महल की रोशनी की आंच की गरमी के कारण तुम सारी रात पानी में खड़े रहे, इसलिए तुम इनाम के सच्चे हकदार नहीं हो सकते।तुम्हे इनाम नहीं दिया जायेगा। धोबी उदास हो गया और बीरबल के पास जाकर निराशा भरे स्वर में बोला, दरबार में बादशाह ने इनाम देने से इंकार कर दिया है। धोबी ने इसका कारण भी बीरबल को बता दिया।

बीरबल ने गरीब धोबी को सांत्वना देकर घर भेज दिया। बादशाह ने अगले दिन बीरबल को दरबार में न पाकर एक खादिम को उन्हें बुलाने के लिए भेजा। खादिम ने उन्हें आकर सूचना दी, बीरबल ने कहा है कि जब उनकी खिचड़ी पूरी पक जाएगी तभी वह दरबार में आ सकेंगे।

बादशाह को यह सुनकर बड़ा अचरज हुआ। वह अपने दरबारियों के साथ बीरबल के घर पहुंचे। वहां उन्होंने देखा कि दो लम्बे बांसों के ऊपर एक हंडिया में चावल रखकर उसे लटकाया गया है और नीचे जमीन पर आग जल रही है।

Akbar Birbal Story in Hindi - बीरबल की खिचड़ी कहानी

बादशाह ने तत्काल पूछा, बीरबल, यह क्या तमाशा है ?
क्या इतनी दूरी पर रखी हंडिया में खिचड़ी पक जाएगी ?
हुजूर जरूर पक जाएगी। बीरबल ने उत्तर दिया।
कैसे ? बादशाह ने कौतूहलवश पूछा ?

जहाँपनाह बिल्कुल वैसे ही जैसे महल के ऊपर जल रहे दिये की गर्मी के कारण धोबी सारी रात नदी के पानी में खड़ा रहा। बीरबल ने कहा। बादशाह अकबर बीरबल का यह तर्कसंगत उत्तर सुनकर लज्जित हुए। उन्होंने तुरन्त धोबी को ढूंढ लाने और पुरस्कृत करने का आदेश जारी कर दिया।
और धोबी को पुरुस्कार भी दे दिया.

दोस्तों जब लोगों को ये बात पता चली तभी से “बीरबल की खिचड़ी ” एक कहावत के रूप में प्रचलित हो गयी।

दोस्तों इस इस अकबर और बीरबल की कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि किसी के काम को कभी आसान नहीं समझना चाहिए बल्कि उस काम के बारे में सोच के उसका हल निकलना चाहिए अथार्त “किसी आसान काम को बहुत मुश्किल बताना या फिर किसी छोटे से काम को करने में बहुत अधिक समय लगा देना”|

Akbar Birbal Story In Hindi – चार सबसे बड़े मूर्ख

एक दिन दरबार में राजकीय कार्यवाही के मध्य अचानक अकबर बीरबल से बोले, “बीरबल! इस राज्य के चार सबसे बड़े मूर्खोंकौन है और उन चारो को हमारे सामने हाज़िर करो और हम तुम्हें एक महीने का समय देते हैं. तुरंत इस काम में लग जाओ.”

अकबर का आदेश सुनकर बीरबल आश्चर्यचकित हुआ. किंतु वह था तो अकबर का मुलाज़िम ही. उनका हर हुक्म बजाना उसका फ़र्ज़ था. वह तुरंत चार मूर्खों की तलाश में निकल पड़ा. एक माह पूरा होने के बाद वह दो व्यक्तियों के साथ अकबर के सामने उपस्थित हुआ. अकबर की नजर जब दो व्यक्तियों पर पड़ी, तो वह बोलै “बीरबल! ये क्या तुम दो ही मूर्खों को लेकर आये हो? हमने एक महीने का वक़्त दिया था और तुम्हें चार मूर्ख लाने के लिए बोला था.”

हुज़ूर! मेरी गुज़ारिश है कि अपना गुस्सा शांत रखिये और मेरी पूरी बात सुने बगैर किसी नतीज़े पर मत पहुँचिये.” बीरबल अकबर का गुस्सा शांत करते हुए बोला.
बीरबल की बात सुन अकबर का गुस्सा कुछ ठंडा हुआ. “जहाँपनाह! ये रहा पहला मूर्ख. इसकी मूर्खता का वर्णन सुनेंगे, तो आप भी सोचेंगे कि ऐसे लोग भी होते हैं इस दुनिया में.” पहले व्यक्ति को आगे कर बीरबल बोला. अकबर ने पूछा. “बताओ. ऐसी क्या मूर्खता कर रहा था ये.

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मैंने इस व्यक्ति को बैलगाड़ी पर बैठकर कहीं जाते हुये देखा. बैलगाड़ी पर बैठा ये अकेला व्यक्ति ही था. और इसने अपनी गठरी सिर पर लाद रखी थी. चकित होकर जब मैंने कारण पूछा. तो ये कहने लगा कि गठरी बैलगाड़ी पर रख दूंगा, तो बैल के ऊपर बोझ बढ़ जायेगा. इसलिए मैंने गठरी अपने सिर पर रख ली है. और बैलगाड़ी में बैठ गया हु। अब इसे मूर्खता नहीं कहेंगे, तो क्या कहेंगे.”

पहले व्यक्ति की मूर्खता का क़िस्सा सुनकर अकबर (Akbar) के चेहरे पर मुस्कराहट तैर गई.

फिर बीरबल ने दूसरे व्यक्ति को आगे किया और बोला,! ये आदमी तो इससे भी बड़ा मूर्ख है. एक दिन मैंने देखा कि ये अपने घर की छत पर भैंस लेकर जा रहा है. मुझे आश्चर्य हुआ, तो मैंने पूछ लिया. लेकिन फिर इसका जवाब सुनकर मैंने तो अपना सिर ही पीट लिया. इसने बताया कि इसके घर की छत पर घास उग आई है. इसलिए ये भैंस को छत पर ले जाता है, ताकि वह वहाँ घास खा सके. घास काटकर ये भैंस को लाकर खिला सकता है. लेकिन ये मूर्ख भैंस को ही छत पर ले जाता है. ऐसा मूर्ख कहीं देखा है आपने?”

“हम्म, वाकई इन दोनो की कारस्तानी बेवकूफ़ाना है. अब बाकी के दो मूर्खों को पेश करो.” अकबर बोले. हुज़ूर! नज़र उठाकर देखिये तीसरा मूर्ख आपको सामने खड़ा दिखाई पड़ेगा.” बीरबल बोला. कहाँ बीरबल? हमें तो यहाँ कोई तीसरा व्यक्ति दिखाई नहीं पड़ रहा.” अकबर इधर-उधर देखते हुए बोले.
“तीसरा मूर्ख मैं हूँ हुज़ूर.” बीरबल सिर झुकाकर बोला, “अब देखिये. मुझे पर कितने महत्वपूर्ण कार्यों की ज़िम्मेदारी है. लेकिन सब कुछ एक तरफ़ हटाकर मैं एक महीने से मूर्खों को खोज रहा हूँ. ये मूर्खता नहीं तो और क्या है?

बीरबल की बात सुनकर अकबर सोच में पड़ गए, फिर बोले, “और चौथा मूर्ख कहाँ है बीरबल? गुस्ताखी माफ़ हुज़ूर, पर चौथे मूर्ख आप हैं. आप हिंदुस्तान के शहंशाह है. इतने बड़े साम्राज्य का भार आपके कंधों पर है. प्रजा के हित के जाने कितने कार्य आपको करवाने हैं. लेकिन उन सबको दरकिनार कर आप एक महीने से मुझसे चार मूर्खों की तलाश करवा रहे हैं. तो चौथे मूर्ख आप हुए ना.  कहते हुए बीरबल ने अपने कान पकड़ लिए.

बीरबल का जवाब सुनकर अकबर को अपनी गलती का अहसास हो गया कि बेफ़िजूल में उन्होंने अपना और बीरबल का काफ़ी वक़्त बर्बाद कर लिया है.

 

Akbar Birbal Story In Hindi – सोने का खेत (Golden Farm Story In Hindi)

दोस्तों अकबर के महल में कई कीमती सजावट की वस्तुएं थीं, लेकिन एक गुलदस्ते से अकबर को खास लगाव था मतलब उसको वो गुलदस्ता बहुत अच्छा लगता था। गुलदस्ते को अकबर हमेशा अपनी पास रखवाते थे। एक दिन अचानक महाराज अकबर का कमरा साफ करते हुए उनके सेवक से वह गुलदस्ता निचे गिर गया और टूट गया। सेवक ने घबराकर उस गुलदस्ते को जोड़ने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह गुलदस्ता पूरी तरह से टूट चूका था।

जब वह उसको नहीं जोड़ पाया तो हार कर उसने टूटा गुलदस्ता कूड़ेदान में फेंक दिया और दुआ करने लगा कि राजा को इस बारे में कुछ पता न चले।लेकिन कुछ देर बाद अकबर जब महल लौटे, तो उन्होंने देखा कि उनका प्रिय गुलदस्ता अपनी जगह पर नहीं है। उन्होंने इधर उड़ाए ढूंढा पर उन्हें कही भी नहीं मिला। राजा ने सेवक से उस गुलदस्ते के बारे में पूछा, तो सेवक डर के मारे कांपने लगा।

सेवक को जल्दी में कोई अच्छा बहाना नहीं सूझा, और डर डर के बोला कि महाराज उस गुलदस्ते को मैं अपने घर ले गया हूं, ताकि अच्छे से साफ कर सकूं। यह सुनते ही अकबर को गुसा आया और जोर से बोले, “मुझे तुरंत वो गुलदस्ता लाकर दो।” अभी के अभी।

अब सेवक क्या करता गुलदस्ता तो टूट चूका था। सेवक के पास बचने का कोई रास्ता नहीं था। सेवक ने महराज अकबर को सच बता दिया कि वो गुलदस्ता टूट चुका है। यह सुनकर राजा और आग बबूला हो गए। और गुसे में आकर राजा ने उस सेवक को फांसी की सजा सुना दी। राजा ने कहा, “झूठ मैं बर्दाश्त नहीं करता हूं। जब गुलदस्ता टूट ही गया था, तो झूठ बोलने की क्या जरूरत थी”।

अगले दिन सभी लोग सभा में बैठ गए और इस घटना के बारे में जब सभा में जिक्र हुआ तो बीरबल ने इस बात का विरोध किया। बीरबल बोले कि झूठ हर व्यक्ति कभी-न-कभी बोलता ही है। किसी के झूठ बोलने से अगर कुछ बुरा या गलत नहीं होता, तो झूठ बोलना गलत नहीं है।

बीरबल के मुंह से ऐसे शब्द सुनकर अकबर उसी समय बीरबल पर भड़क गए। उन्होंने सभा में लोगों से पूछा कि कोई ऐसा है यहां जिसने झूठ बोला हो। सबने राजा को कहा कि नहीं वो झूठ नहीं बोलते। यह बात सुनते ही राजा ने बीरबल को राज्य से निकाल दिया। अब बीरबल ने सोचा अब कुछ करना ही पड़ेगा।

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राज दरबार से निकलने के बाद बीरबल ने ठान ली कि वो इस बात को साबित करके रहेंगे कि हर व्यक्ति अपने जीवन में कभी-न-कभी झूठ बोलता है। बीरबल के दिमाग में एक बात आई, जिसके बाद बीरबल सीधे सुनार के पास गए। उन्होंने जौहरी से सोने की गेहूं जैसी दिखने वाली बाली बनवाई और उसे लेकर महाराज अकबर की सभा में पहुंच गए।

अकबर ने जैसे ही बीरबल को सभा में देखा, तो पूछा कि अब तुम यहां क्यों आए हो मेने तो तम्हे राज्य से बाहर कर दिया था। बीरबल बोले, “जहांपनाह आज ऐसा चमत्कार होगा, जो किसी ने कभी नहीं देखा होगा। बस आपको मेरी पूरी बात सुननी होगी।” राजा अकबर और सभी सभापतियों की जिज्ञासा बढ़ गई और राजा ने बीरबल को अपनी बात कहने की अनुमति दे दी।

Akbar Birbal Story In Hindi - सोने का खेत
Akbar Birbal Story In Hindi – सोने का खेत

बीरबल बोले, “आज मुझे रास्ते में एक सिद्ध पुरुष के दर्शन हुए। उन्होंने मुझे यह सोने से बनी गेहूं की बाली दी है और कहा कि इसे जिस भी खेत में लगाओगे, वहां सोने की फसल उगेगी खेत में सोना ही सोना होगा। अब इसे लगाने के लिए मुझे आपके राज्य में थोड़ी-सी जमीन चाहिए।” राजा ने कहा, “यह तो बहुत अच्छी बात है, राजा खुश हगो गया। और राजा बोला चलो हम तुम्हें जमीन दिला देते हैं।” अब बीरबल कहने लगे कि मैं चाहता हूं कि पूरा राज दरबार यह चमत्कार देखे। बीरबल की बात मानते हुए पूरा राज दरबार खेत की ओर चल पड़ा।

और अब सभी लोग खेत में आ गए हैं। “खेत में पहुंचकर बीरबल ने कहा कि इस सोने से बनी गेहूं की बाली से फसल तभी उगेगी, जब इसे ऐसा व्यक्ति लगाए, जिसने जीवन में कभी झूठ न बोला हो। राजा चौक गया क्युकी राजा ने भी कभी कभी न झूठ
बोलै ही होगा। बीरबल की बात सुनकर सभी राजदरबारी खामोश हो गए और कोई भी गेहूं की बाली लगाने के लिए तैयार नहीं हुआ।

राजा अकबर बोले कि क्या राजदरबार में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जिसने अपने जीवन में कभी झूठ न बोला हो? सभी खामोश थे। बीरबल बोले, “जहांपनाह अब आप ही इस बाली को खेत में रोप दीजिए।” बीरबल की बात सुनकर महाराज का सिर झुक गया। उन्होंने कहा, “बचपन में मैंने भी कई झूठ बोले हैं, तो मैं इसे कैसे लगा सकता हूं.

इतना कहते ही बादशाह अकबर को यह बात समझ आ गई कि बीरबल सही कह रहे थे कि इस दुनिया में कभी-न-कभी सभी झूठ बोलते हैं। इस बात का एहसास होते ही अकबर उस सेवक की फांसी की सजा को रोक देते हैं। और खेत से सभी लोग वापिस चले जाते हैं फर राजा को भी अपने गलती का एहसास होता है।

दोस्तों इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि बिना सोचे समझे किसी को बड़ा दण्ड नहीं देना चाहिए। हर काम को सोच-विचार कर के ही फैसला लेना चाहिए। साथ ही एक छोटे से झूठ की वजह से किसी व्यक्ति का आंकलन भी नहीं किया जाना चाहिए, क्योंकि कुछ परिस्थितियां ऐसी होती है कि झूठ बोलना पड़ता है।

निष्कर्ष – दोस्तों आशा करता हु कि आपको Akbar Birbal Story in Hindi PDF पसंद आया होगा और इन स्टोरी पढ़ के आपको बहुत सीखने को मिला होगा क्युकी अकबर और बीरबल की कहानी बहुत ही पसंद करते हैं लोग। और दोस्तों अगर आप अकबर और बीरबल की बुक खरीदना चाहते हैं तो आप को अमेज़न में मिल जाएगी आप इनकी स्टोरी की बुक वह से खरीद सकते हैं। थैंक यू। 

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